निर्जला एकादशी

ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्री नारायण हरी को निर्जल रह कर अर्थात सूर्योदय से सूर्योदय तक बिना पानी पिए श्री विष्णु भगवान् को प्रसन्न करने के लिए उनकी  पूजा उपासना करते हुए कड़े नियमों के साथ निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। आपको बता दें कि भगवान विष्णु को यह व्रत सबसे ज्यादा प्रिय है। यह व्रत करने वाले भक्त भगवान् को अति प्रिय होते हैं। श्री विष्णु भगवन की, एकादशी का व्रत एवं पूजा करने वालों पर अति कृपा होती है। इस व्रत में बहुत गर्मी के बीच पानी नहीं पीने के कारण कठिन व्रत माना जाता है। 
इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब 24 एकादशियों में दो एकादशी और जुड़ जाती हैं और कुल 26 एकादशी हो जाती हैं। सालभर की सभी एकादशियों से ज्यादा महत्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल की एकादशी का है। मान्यता है कि इस एक दिन के व्रत से सालभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिलता है।

आइये जानते है शुभ महुर्त :

इस वर्ष आज के दिन मंगलवार, 2 जून को निर्जला एकादशी है।

एकादशी तिथि प्रारंभ - दोपहर 02:57 -----01 जून 2020
एकादशी तिथि समाप्त - दोपहर 12:04 ----02 जून 2020
पारण मुहूर्त -सुबह 05:23 से 08:8 तक ----03 जून 2020


इस एकादशी को क्यों कहा जाता है -निर्जला एकादशी
यह व्रत निर्जल रहकर यानी बिना पानी पिए किया जाता है, इसीलिए इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है। व्रत करने वाले भक्त पानी भी नहीं पीते हैं। सुबह-शाम भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अगले दिन द्वादशी तिथि पर पूजा-पाठ और ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद खुद भोजन ग्रहण करते हैं।

इस एकादशी का नाम क्यों है -भीमसेनी एकादशी : 
महाभारत की एक प्रचलित कथा के अनुसार भीम ने एकादशी व्रत के संबंध में वेदव्यास जी से कहा कि मैं एक दिन तो क्या, एक समय भी खाने के बिना नहीं रह सकता हूं, इस वजह से मैं एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त नहीं कर सकुँगा। पांडव पुत्र भीम के लिए कोई भी व्रत करना कठिन था क्योंकि भूखे रहना उनके लिए संभव न था। लेकिन वे एकादशी व्रत करना चाहते थे। तब वेदव्यास ने ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी के बारे में भीम को बताया। वेद व्यास व भीष्म पितामह ने भीम को बताया कि वर्ष में मात्र एक बार ज्येष्ठ माह के शुक्लपक्ष की निर्जला एकादशी कर ले तो उन्हें सभी चौबीस एकादशियों (यदि अधिक मास हो तो छब्बीस) का फल मिलेगा। उन्होंने भीम से कहा कि तुम इस एकादशी का व्रत करो। उनके कहने पर भीम ने यह व्रत रखा था इसीलिए इसका नाम भीमसेनी एकादशी हो गया। कुछ क्षेत्रों में इसे पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

एकादशी का व्रत करने के बड़े लाभ
1. पद्मपुराण में निर्जला एकादशी व्रत करने द्वारा मनोरथ सिद्ध होने की बात कही गई है।
2. इस एकादशी के व्रत को विधिपूर्वक करने से सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिलता है।
3. भक्त पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। निर्जला एकादशी की रात को सोना वर्जित होता है, अतः रात को जागरण करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर तथा मन पर साकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा ऊर्जा की वृद्धि होती है।  
4 . इस दिन 'ओम नमोः भगवते वासुदेवाय' के मंत्र का जाप करने से साकारात्मक ऊर्जा का परवाह होता है तथा साधक के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। 
5.  ब्राह्मणों को तथा किसी सुपात्र को  कपड़े, छाता, जूता, दूध, फल, तुलसी पत्तियां, जल का भरा मटका, शर्बत, पंखा, तिल, मिठाई आदि दान करना अति शुभ माना जाता है। इस दान को करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है।

श्री विष्णु भगवान् की पूजा कैसे करें :
श्री विष्णु भगवान् का आवाहन कर उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें तथा सुगन्धि करें। उनको पीले रंग के पुष्प अथवा पुष्प माला अर्पित करते हुए सुन्दर पीला आसान पर विराजमान करना चाहिए। आचमनीय जल अर्पित करें। पीले रंग के वस्त्र प्रदान चाहिए। उनको चन्दन अर्पण करें। पंचामृत अर्पित करें। पंचमेवा अर्पण करें। पीले फल या आम या ऋतू फल अर्पित करें। भगवान्  को तुलसी अर्पण करने से भगवन बहुत प्रसन्न होते हैं। तुलसी के बिना श्री हरी की पूजा अधूरी मानी जाती है।  'ओम नमोः भगवते वासुदेवाय' का जप जितना हो सके उतना अधिक से अधिक करें। नैवेद्य का भोग लगाए तथा यज्ञ (यदि संभव हो तो ) करते हुए आरती करें।   

वह कौन से कार्य हैं जो नहीं करना चाहिए निर्जला एकादशी के दिन:  
1. चावल खाना इस दिन सख्त मना होता है।
2. किसी की निंदा या चुगली नहीं करनी चाहिए।
3. क्रोध करने से बचना चाहिए।
4. कोई पाप नहीं करना चाहिए।
5. किसी को सतना नहीं चाहिए।
6. काम वासना में लिप्त नहीं होना चाहिए।
7. रात को सोना नहीं चाहिए।

आप सभी को निर्जला एकादशी की हार्दिक शुभकामनाये देते हुए श्री विष्णु भगवान् से प्राथना करती हूँ कि वे आपके सभी मनोरथ पूर्ण करें।

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Soniya Kataria
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