श्री दुर्गासप्तशती माहात्म्य
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।। मेरी आन रखना मेरी शान रखना, मेरी मैय्या बेटे का तुम ध्यान रखना बनाना मेरे भाग्य दुःख दूर करना, तू है लक्ष्मी मेरे भण्डार भरना। न निराश दर से मुझे तू लौटाना, सदा बैरियों से मुझे तू बचाना मुझे तो तेरा बल है विशवास तेरा, तेरे चरणों में है नमस्कार मेरा। चामुण्डा दसों दिशाओं में हर कष्ट तुम मेरा हरो, संसार में माता मेरी रक्षा करो रक्षा करो रक्षा करो मातेश्वरी दास के कष्ट मिटाओ, मेरी रक्षा को सदा सिंह चढ़ी माँ आओ। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ: । निर्विघ्नं कुरुमेदेव सर्वकार्येशु सर्वदा।। परम गुरु भगवान शिव का दक्षिणामूर्ति रूप अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरं। ततपदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरुवे नमः।। प्रथमे गुरु वंदना करां, फेर मनवा गणेश सिमरा माता शारदा, मेरे कंठ करो परवेश, जय माँ मेरी आन रखना मेरी शान रखना माँ बछड़ा विनती करे, देयो चरना दा प्यार चिंतपूर्णी चिंता हरो, काली दयो वरदान, जय माँ मेरी आन रखना मेरी शान रखना उच्चा भवन रंगील्डा, विच्च पिण्डी दा...