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Showing posts from April, 2020

अक्षय तृतीया

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अक्षय तृतीया क्या है -अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। अक्षय तृतीया वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन  बसंत ऋतु का  अंत और ग्रीष्म ऋतु का आगमन  प्रारंभ होता है।  अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है  जैसे होली, दीवाली, जन्माष्टमी और शिवरात्री को हिन्दू धर्म में विशेष माना जाता है वैसे ही अक्षय तृतीया भी एक विशेष मुहूर्त है जिसमें   बिना कोई पञ्चाङ्ग  देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य संपन्न किये जाते हैं जैसे:-   #विवाह संस्कार  ➤ विवाह संस्कार संपन्न करना ➤ कोई भी शुभ व नए काम की शुरुवात करना। ➤ कोई नया व्यापार आरंभ करना। ➤ सोना, चांदी, रत्न और आभूषण आदि खरीदना। ➤ गाडी, वाहन, मोबाइल व कीमती वस्तुएँ लाना। ➤ घर, जमीन खरीदना या ग्रह प्रवेश करना। ➤ घर मैं कोई शुभ धार्मिक कार्य करना। ➤ दान दक्षिणा अदि करना, भूखे को भोजन देना। ➤ नदियां में स्नान करना।  ➤ ब्राह्मणो को भोजन करवाना। दान दक्षिणा देना।  अक्षय तृतीया का मु...

बल वे दीवेया लम्बी लाट

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दीप ज्योति परब्रह्म: दीप ज्योति जनार्दन:।  दीपोहरते में पापं सांध्य दीपं नमोस्तुते।। शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धि विनाशाय दीपज्योति: नमोस्तुते॥ भारतीय संस्कृति में दीप प्रज्वलन परंपरा      भारतीय संस्कृति की गरिमा अतुल्य है जो कि आदिकाल से चली आ रही है। हमारी इस संस्कृति की परंपराओं के पीछे तात्विक महत्त्व, वैज्ञानिक तथा मनोवैज्ञानिक रहस्य आवश्य ही छिपा हुआ रहता है। ऐसी ही एक अद्भुद परंपरा है - दीपक प्रज्वलित करने की परंपरा जो कि भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है। हिन्दू धर्म में कोई भी पूजा होम इत्यादि मंगल कार्य में दीपक प्रज्वलित करने की एक अनिवार्य परंपरा है। किसी भी मंगल कार्य की शुरुवात दीपक प्रज्वलित करने से ही की जाती है।  मन भीतर एक दीप आस्था का   दीपक प्रतीक है आस्था का और विश्वास का। दीपक सौभाग्य का एक चिन्ह है। दीपक जीवन में मंगल का प्रतीक है। एक विश्वास मन में रख कर हर घर में और मंदिर में भगवान् के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है कि इस दीपक की यह...