अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया क्या है -अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। अक्षय तृतीया वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन बसंत ऋतु का अंत और ग्रीष्म ऋतु का आगमन प्रारंभ होता है। अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है जैसे होली, दीवाली, जन्माष्टमी और शिवरात्री को हिन्दू धर्म में विशेष माना जाता है वैसे ही अक्षय तृतीया भी एक विशेष मुहूर्त है जिसमें बिना कोई पञ्चाङ्ग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य संपन्न किये जाते हैं जैसे:-
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| #विवाह संस्कार |
➤कोई भी शुभ व नए काम की शुरुवात करना।
➤कोई नया व्यापार आरंभ करना।
➤सोना, चांदी, रत्न और आभूषण आदि खरीदना।
➤गाडी, वाहन, मोबाइल व कीमती वस्तुएँ लाना।
➤घर, जमीन खरीदना या ग्रह प्रवेश करना।
➤घर मैं कोई शुभ धार्मिक कार्य करना।
➤दान दक्षिणा अदि करना, भूखे को भोजन देना।
➤नदियां में स्नान करना।
➤कोई नया व्यापार आरंभ करना।
➤सोना, चांदी, रत्न और आभूषण आदि खरीदना।
➤गाडी, वाहन, मोबाइल व कीमती वस्तुएँ लाना।
➤घर, जमीन खरीदना या ग्रह प्रवेश करना।
➤घर मैं कोई शुभ धार्मिक कार्य करना।
➤दान दक्षिणा अदि करना, भूखे को भोजन देना।
➤नदियां में स्नान करना।
➤ब्राह्मणो को भोजन करवाना। दान दक्षिणा देना।
अक्षय तृतीया का मुहूर्त कब है -
➤अक्षय तृतीया 30 अप्रैल 2025
अक्षय तृतीया पूजा का शुभ मुहूर्त- अक्षय तृतीया 29 अप्रैल यानी मंगलवार शाम को 5 बजकर 32 मिनट पर लग चुकी है। इसका समापन आज दोपहर में 2 बजकर 13 मिनट पर होगा। शास्त्रों में बताई गई उदया तिथि की मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया की पूजा और दान पुण्य के कार्य आज किए जाएंगे। आज की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 13 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक है। उसके बाद दोपहर में अक्षय तृतीया की पूजा का मुहूर्त 11 बजकर 1 मिनट से 12 बजे तक है। इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से आपको अक्षय फल और मां लक्ष्मी की असीम अनुकम्पा प्राप्त होगी।
आइये जानते हैं वे मुख्य कारण जो अक्षय तृतीया का महत्व बढ़ाते हैं :-
➤अक्षय तृतीया का दिन सर्वसिद्ध है इस लिए बेहद शुभ एवं खास माना जाता है।
➤इस दिन सतयुग और त्रेतायुग का प्रारम्भ हुआ था।
➤श्री विष्णु जी के चौबीस अवतारों में से जो तीन अवतार इस दिन हुए थे वे हैं- नर नारायण, परशुराम व हयग्रीव। ➤ब्रम्हा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इस दिन हुआ था।
➤तीर्थ बदरीनाथ के कपाट खुलते हैं।
➤वृन्दावन में बांके बिहारी जी के दर्शन होते हैं।
➤गणेश जी ने व्यास जी के साथ मिल कर महाभारत लिखना प्रारंम्भ किया था
अक्षय तृतीया के दिन गंगा स्नान का महत्त्व
➤इस दिन सतयुग और त्रेतायुग का प्रारम्भ हुआ था।
➤श्री विष्णु जी के चौबीस अवतारों में से जो तीन अवतार इस दिन हुए थे वे हैं- नर नारायण, परशुराम व हयग्रीव। ➤ब्रम्हा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इस दिन हुआ था।
➤तीर्थ बदरीनाथ के कपाट खुलते हैं।
➤वृन्दावन में बांके बिहारी जी के दर्शन होते हैं।
➤गणेश जी ने व्यास जी के साथ मिल कर महाभारत लिखना प्रारंम्भ किया था
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| #गंगा स्नान, #ध्यान, #दीप दान #साधना, #लक्ष्मी-नारायण साधना #गौ दान, #हवन |
➤अक्षय तृतीया के दिन गंगा नदी में स्नान करने से अनगिनत पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्त्व है। इस दिन गंगा स्नान करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। अतः प्रातकाल उठकर अवश्य ही गंगा स्नान करना चाहिए।
➤गंगा नदी तक पहुँचना यदि संभव न हो तो स्नान के पानी में घर में रखा गंगा जल मिला लें तथा गंगा माँ को प्रणाम करें तथा भाव करें कि आप गंगा स्नान ही कर रहे हैं।
➤गंगा नदी तक पहुँचना यदि संभव न हो तो स्नान के पानी में घर में रखा गंगा जल मिला लें तथा गंगा माँ को प्रणाम करें तथा भाव करें कि आप गंगा स्नान ही कर रहे हैं।
#अक्षय तृतीया के दिन किस देवी या देवता की पूजा करे और किस मंत्र का जाप करे:-
अक्षय तृतीया के दिन नारायण पूजा/ साधना कैसे करें
➤शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की शांत चित्त होकर विधि विधान से पूजा करने का प्रावधान है।
➤नारायण जी के लिए मन्त्र जप 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' जितना संभव हो करें।
➤विष्णु सहस्रनामं का पाठ करें।
➤नैवेद्य में ग्रीष्म ऋतू के मौसमी फल जैसे खरबूजा, आम, आंवला, जौ या गेहूँ का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पित करना चाहिए। पीले वस्त्र भी अर्पण कर सकते हैं।
➤सत्य नयायन की कथा का आयोजन भी कर सकते हैं। किसी विद्वान् पंडित से करवायें या खुद सक्षम हो तो खुद करें।
➤श्री विष्णु जी की प्रसन्नता के लिए इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा श्वेत कमल, स्वेत गुलाब या स्वेत पुष्प अर्पित करते हुए करें।
अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी साधना कैसे करें
➤लक्ष्मी जी की साधना सुख सौभाग्य देने वाली और दरिद्रता दूर करने वाली होती है। लक्ष्मी जी की कृपा से ही घर में बरकत और जीवन में उन्नति होई है तथा घर धन धान्य से भरपूर हो जाता है। व्यवसाय में बढ़ौती होती है। अतः इस दिन उपवास कर एक समय शुद्ध और हल्का भोजन करना चाहिए और इस दिन विशेष अनुष्ठान कर लक्ष्मी जी की साधना करेंजो की विशेष फलदायी है। लक्ष्मी साधना में कौड़ी, गोमती चक्र आदि रख सकते है।
➤महालक्ष्मी मन्त्र - ' ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलानने प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः '
➤लक्ष्मी बीज मन्त्र - 'ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः '
➤लक्ष्मी गायित्री मन्त्र - 'ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ॐ '
➤लक्ष्मी जी का अति विशेष कनकधारा स्तोत्र की साधना कनकधारा यंत्र सामने रख कर करें 108 बार पाठ अनुष्ठान कर करें।
अक्षय तृतीया के दिन श्री कृष्ण की पूजा कैसे करें
अक्षय तृतीया के दिन पितरों के लिए पूजा कैसे करें
➤पितरों को तारने के लिए विशेष रूप से प्रातकाल स्नान कर ' ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' मन्त्र का उच्चारण करते हुए पीपल के पेड़ में शुद्ध ताँबे के लोटे से जल चढ़ायें और 108 बार पीपल के पेड़ की प्रदक्षिणा करनी चाहिए यदि न संभव हो तो यथायोग्य करनी चाहिए। पुराणों में लिखा गया है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान, संध्या के समय दक्षिण दिशा में दीप दान अथवा किसी और प्रकार का दान,अक्षय फल प्रदान करता है।
➤अक्षय तृतीया के दिन क्या दान करें
➤शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया का किया गया दान भी अक्षय फल देता है। इस लिए इस दिन दान का बहुत ही महत्त्व है। हिन्दू धर्म में दान ब्राह्मण को दिया जाता है। अथवा किसी सुपात्र को दिया गया दान भी उत्तम है।
➤अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण को भोजन करवाएं तथा दक्षिणा के साथ अन्नदान, फल, बर्तन, वस्त्र, गौ, सोना, चांदी, भूमि आदि का दान सर्वोत्तम है।
➤अक्षय तृतीया के दिन ग्रीष्म ऋतू के आगमन का दिन है इस लिए इस दिन गरीब को जूता, चप्पल, छाता, जल से भरे मिटटी के घडे, पंखा, सकोरे, शरबत, खरबूजे, तरबूज, ककड़ीअदि मौसमी फल दान करें।
अक्षय तृतीया के दिन नारायण पूजा/ साधना कैसे करें
➤शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की शांत चित्त होकर विधि विधान से पूजा करने का प्रावधान है।
➤नारायण जी के लिए मन्त्र जप 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' जितना संभव हो करें।
➤विष्णु सहस्रनामं का पाठ करें।
विष्णु सहस्रनामं सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें
➤नैवेद्य में ग्रीष्म ऋतू के मौसमी फल जैसे खरबूजा, आम, आंवला, जौ या गेहूँ का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पित करना चाहिए। पीले वस्त्र भी अर्पण कर सकते हैं। ➤सत्य नयायन की कथा का आयोजन भी कर सकते हैं। किसी विद्वान् पंडित से करवायें या खुद सक्षम हो तो खुद करें।
➤श्री विष्णु जी की प्रसन्नता के लिए इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा श्वेत कमल, स्वेत गुलाब या स्वेत पुष्प अर्पित करते हुए करें।
➤केले के पौधे में दीप दान कर सकते हैं।
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी भजन सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें
अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी साधना कैसे करें
➤लक्ष्मी जी की साधना सुख सौभाग्य देने वाली और दरिद्रता दूर करने वाली होती है। लक्ष्मी जी की कृपा से ही घर में बरकत और जीवन में उन्नति होई है तथा घर धन धान्य से भरपूर हो जाता है। व्यवसाय में बढ़ौती होती है। अतः इस दिन उपवास कर एक समय शुद्ध और हल्का भोजन करना चाहिए और इस दिन विशेष अनुष्ठान कर लक्ष्मी जी की साधना करेंजो की विशेष फलदायी है। लक्ष्मी साधना में कौड़ी, गोमती चक्र आदि रख सकते है।
➤महालक्ष्मी मन्त्र - ' ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलानने प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः '
➤लक्ष्मी बीज मन्त्र - 'ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः '
➤लक्ष्मी गायित्री मन्त्र - 'ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ॐ '
➤लक्ष्मी जी का अति विशेष कनकधारा स्तोत्र की साधना कनकधारा यंत्र सामने रख कर करें 108 बार पाठ अनुष्ठान कर करें।
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| कनक धारा यंत्रम कनक धरा स्तोत्र सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें ⇒kanakdhara Stotram
श्री सूक्तम सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें
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➤शास्त्रों के अनुसार " य: करोति तृतीयायां कृष्णं चन्दनं भूषितं " अथार्त - श्री कृष्ण जी को प्रसन्ता के लिए अक्षय तृतीया के दिन श्री कृष्ण को श्वेत चन्दन अर्पण कर लेप लगावें तथा फल फूल नैवेद्य अर्पित करते हुए पूजा करें। श्री कृष्ण जी युधिष्टर से कहते है कि- 'इस दिन का किया गया दान, स्नान, पूजा का अक्षय फल प्राप्त होता है।'
अक्षय तृतीया के दिन पितरों के लिए पूजा कैसे करें
➤पितरों को तारने के लिए विशेष रूप से प्रातकाल स्नान कर ' ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' मन्त्र का उच्चारण करते हुए पीपल के पेड़ में शुद्ध ताँबे के लोटे से जल चढ़ायें और 108 बार पीपल के पेड़ की प्रदक्षिणा करनी चाहिए यदि न संभव हो तो यथायोग्य करनी चाहिए। पुराणों में लिखा गया है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान, संध्या के समय दक्षिण दिशा में दीप दान अथवा किसी और प्रकार का दान,अक्षय फल प्रदान करता है।
➤अक्षय तृतीया के दिन क्या दान करें
➤शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया का किया गया दान भी अक्षय फल देता है। इस लिए इस दिन दान का बहुत ही महत्त्व है। हिन्दू धर्म में दान ब्राह्मण को दिया जाता है। अथवा किसी सुपात्र को दिया गया दान भी उत्तम है।
➤अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण को भोजन करवाएं तथा दक्षिणा के साथ अन्नदान, फल, बर्तन, वस्त्र, गौ, सोना, चांदी, भूमि आदि का दान सर्वोत्तम है।
➤अक्षय तृतीया के दिन ग्रीष्म ऋतू के आगमन का दिन है इस लिए इस दिन गरीब को जूता, चप्पल, छाता, जल से भरे मिटटी के घडे, पंखा, सकोरे, शरबत, खरबूजे, तरबूज, ककड़ीअदि मौसमी फल दान करें।
अक्षय तृतीया के दिन नवीन वस्त्र धारण करें और कच्चे दूध, गंगा जल से आभूषणों को शुद्ध कर उनको पहने, श्रृंगार करें, शुभ काम करें तथा सत्तू का सेवन जरूर करें। जप-तप, पूजा-साधना, दान आवश्य ही करें। यह अक्षय तृतीया आपके लिए अति मंगलकारी हो ऐसी मैं कामना करती हूँ।
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