तुलसी शालिग्राम विवाह




तुलसी महत्व
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हिन्दू धर्म में तुलसी का पौधा बहुत ही पूजनीय और महत्वपूर्ण होता है। प्रत्येक हिन्दू परिवार के घर के आँगन में 
तुलसी का पौधा जरूर दिखाई देता है। भगवान् की पूजा के साथ साथ तुलसी जी की पूजा का भी बहुत ही महत्व 
है। तुलसी भगवान् विष्णु जी की अति प्रिय है क्यूँकि तुलसी जी भगवान विष्णु की भक्ति किया करती थी। तुलसी 
पत्र के बिना विष्णु भगवन का पूजन अधूरा माना जाता है।  तुलसी जी में कई औषधीय गुण मौजूद हैं तथा आध्यात्मिक
दृष्टि से भी तुलसी जी का पौधा अति पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जहाँ पर तुलसी जी विराजमान होती 
हैं वहां पर यमदूत नहीं आते। 

तुलसी शालिग्राम विवाह  
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तुलसी जी को घर की कन्या के रूप में पूजा और जल से रोज सींचा जाता है। कार्तिक मास आने पर पूरा मास ब्रह्म 
मुहूर्त में स्नान कर तुलसी जी को जल अर्पण करने के बाद कार्तिक कथा की जाती है जिसमें तुलसी कथा का भी वर्णन
आता है। कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी जी का विवाह भगवान्  विष्णु सवरूप शालिग्राम से 
किया जाता है तथा उत्सव मनाया जाता है। कार्तिक मास में तुलसी पूजन एवं तुलसी विवाह करने से कन्यादान करने 
का फल प्राप्त होता है। 
  
तुलसी विवाह कथा सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें 
👇
तुलसी का एक 
नाम वृंदा भी
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आइए जानते हैं वृंदा के तुलसी बनने की पूरी कहानी तथा तुलसी विवाह की कथा जिसको पढ़ने एवं सुनने से
कार्तिक मास में की गयी पूजा सफल तथा सम्पूर्ण होती है।  



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विष्णु भगवान् को निद्रा से उठाना 
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भगवन विष्णु भगवन शिव को त्रिलोक का काम सौंप कर हर साल आषाढ़ मास की शुकल पक्ष की एकादशी के दिन क्षीर सागर में गहरी योग निद्रा में 4 मास के लिए सो जाते हैं तथा फिर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी वाले दिन जाग जाते है। इस को  देव उठानी एकादशी भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान् विष्णु जब तक सोते है उन दिनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे की मुंडन संस्कार, विवाह, जनेऊ, मकान की नींव डालने का काम नहीं किया जाता। इस दिन सभी देवी देवता भगवन के उठने की ख़ुशी में देव दीपावली मानते है। 
इस दिन भगवन विष्णु जी की मूर्ति को एक सुन्दर छोटे पलंग पर बिस्तर लगा कर शयन करवा दें। उनके ऊपर एक सुन्दर चादर ओढ़ा दें। भगवान् विष्णु जी के चरण चिन्ह रंगोली द्वारा अपने घर में स्थापित करें तथा नारायण जी का आवाहन करें। फिर कुछ देर बाद नारायण को घंटे, शंख नाद कर के तथा घंटियां बजाते हुए हिला कर उठायें। उठाते समय यह मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं:

"उठो देवा बैठो देवा 
अंगुरिया चटकाओ देवा। 
नयी सूत नयी कपास 
देव उठाये कार्तिक मास।। "
या 
"उठो देव सांवरा, भाजी, बोर आंवला, गन्ना की झोपड़ी में, शंकर जी की यात्रा।।" 
भावार्थ है - हे सांवले सलोने देव, भाजी, बेर, आंवला चढ़ाने के साथ हम चाहते हैं कि आप जाग्रत हों, सृष्टि का कार्यभार संभालें और शंकर जी को पुन: अपनी यात्रा की अनुमति दें। 

श्री विष्णु पूजन 
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इस के बाद नारायण भगवान् का भाव पूर्ण पूजन करिए। उनको स्नान आदि करवा कर नए वस्त्र पहनाएं तथा पंचामृत तुलसी दल सहित, पंचमेवा, पीले फूल, पीले फल, तिल, धूप, दीप, नवैद्य, प्रासाद, दक्षिणा अर्पण करते हुए तुलसी की माला से निम्नलिखित मंत्र का जप करें:
" ॐ नमो भगवते वासुदेवाये " 


तुलसी विवाह की साधारण विधि 
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  • शाम के समय सारा परिवार इसी तरह तैयार हो जैसे विवाह समारोह के लिए होते हैं। 
  • तुलसी का पौधा आंगन, छत या पूजा घर में बिलकुल बीच में रखें। 
  • तुलसी के गमले के ऊपर फूलों का तथा गन्ने का मंडप सजाएं। 
  • तुलसी देवी को लाल सुन्दर साड़ी पहनाये तथा समस्त सुहाग सामग्री जैसे श्रृंगार, सिंदूर, बिंदी, लाल चूड़ियाँ, मेहंदी, इत्र के साथ लाल चुनरी चढ़ाएं।  
  • गमले में या एक आसन पर शालिग्राम जी को आदरपूर्वक रखें।
  • दूध में हल्दी का लेप मंडप पर तथा शालिग्राम जी को, तुलसी जी को लगाएं।  
  • सालिग्राम जी पर चावल नहीं चढ़ाने हैं। उन पर तिल चढ़ाई जा सकती है।  
  • हिंदू धर्म में विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक अवश्य गायें। 
  • मिठाई, भाजी, फल, बेर और आंवला जैसी सामग्री बाजार में पूजन में चढ़ाने के लिए मिलती है वह लेकर आएं। 
  • तुलसी जी का विवाह किसी योग्य पुरोहित जी से विधि विधान से से संपन्न करवाए तथा तुलसी जी का कन्यादान कर पुत्री न होने पर भी कन्यादान का विशेष फल प्राप्त करें। 
  • तुलसी जी की तथा शालिग्राम जी की परिक्रमा करनी चाहिए। 
  • तुलसी जी की विदाई मंदिर में की जाती है। 
  • घर में एक नयी तुलसी ले कर स्थापित करें। 
  • प्रसाद का वितरण करें। 

शालिग्राम जी की स्थापना 
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शालिग्राम जी का सवरूप ऐसा हो जैसे काले रंग में अंडाकार, चिकनी सतह वाला विशेष चमकीला पत्थर जो की नर्मदा नदी तथा नेपाल की गंडकी नदी के तल से मिलता है, इनकी प्राण प्रतिष्ठा करने की भी कोई जरूरत नहीं होती क्यूंकि यह पत्थर स्वयंभू होते हैं तथा भगवान् विष्णु जी का स्वरुप होते हैं। यह माना जाता है की जिस घर में शालिग्राम जी तुलसी जी के साथ स्थापित होते हैं उस घर का वास्तु दोष और अन्य बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। उन को तुलसी जी के साथ विवाह के बाद तुलसी जी के गमले में स्थान दे दें। अगर आप चाहें तो उन को घर के मंदिर में उनका एक सिंघहासन लगा कर स्थान दे दें। उनको रोज तुलसी दल से युक्त जल से स्नान करवा कर बाकी बचे जल को घर मैं छिड़काव करें तथा घर के सभी सदस्य वह चरणामृत ग्रहण करें तथा अपने  जीवन से सभी कष्ट बाधाएं दूर करते हुऐ हरी नारायण तथा तुलसी देवी जी से सुखमय, संपन्न, स्वस्थ, सुन्दर, आनदपूर्ण जीवन का आशीर्वाद  प्राप्त  करें। 

तुलसी महारानी नमो नमो - आरती 

author
Soniya Kataria
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